UP Board Exam Hindi पठित खण्ड काव्य के निर्धारित जिले

UP Board Exam Hindi 
पठित खण्ड काव्य के निर्धारित जिले

पठित खण्ड काव्य / रचनाकार / निर्धारित जिले

1. मुक्ति दूत (डॉ० राजेन्द्र मिश्र)

(1) आगरा, (2) बस्ती, (3) गाजीपुर (4) फतेहपुर, (5) बाराबंकी, (6) उन्नाव जिलों के लिए निर्धारित।

2. ज्योति जवाहर (श्री देवीप्रसाद शुक्ल 'राही')

(1) कानपुर, (2) प्रतापगढ़, (3) मिर्जापुर, (4) ललितपुर, (5) रामपुर, (6) गोंडा जिलों के लिए निर्धारित ।

3. अग्रपूजा (पं० रामबहोरी शुक्ल)

(1) इलाहाबाद (2) आजमगढ़, (3) मथुरा जिलों के लिए निर्धारित ।

4. मेवाड़ मुकुट (गंगारत्न पाण्डेय)

(1) बुलन्दशहर, (2) देवरिया, (3) बरेली, (4) सीतापुर, (5) सुल्तानपुर, (6) बहराइच जिलों हेतु निर्धारित।

5. जय सुभाष (विनोदचन्द्र पाण्डेय 'विनोद')

(1) लखनऊ, (2) सहारनपुर, (3) फैजाबाद, (4) बाँदा, (5) झाँसी, (6) हरदोई जिलों के लिए निर्धारित ।

6. मातृभूमि के लिए (डॉ० जयशंकर त्रिपाठी)

(1) गोरखपुर, (2) मुरादाबाद, (3) शाहजहाँपुर, (4) लखीमपुर, (5) मैनपुरी, (6) मुज़फ्फरनगर जिलों के लिए निर्धारित ।

7. कर्ण (केदारनाथ मिश्र 'प्रभात')

(1) अलीगढ़, (2) जौनपुर, (3) बलिया, (4) हमीरपुर, (5) एटा जिलों के लिए निर्धारित।

8. कर्मवीर भरत (लक्ष्मीशंकर मिश्र 'निशंक')

(1) मेरठ, (2) फर्रुखाबाद, (3) पीलीभीत, (4) रायबरेली जिलों के लिए निर्धारित ।

9. तुमुल (श्यामनारायण पाण्डेय)

(1) वाराणसी, (2) इटावा, (3) बिजनौर, (4) जालौन, (5) अल्मोड़ा, (6) बदायूँ (7) औरैया जिलों के लिए निर्धारित।

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हेलो दोस्तों,

  नमस्कार मेरा नाम है रोहित कुमार। आप सभी का स्वागत है हमारे इस ब्लॉग स्पॉट पर।
  
 यहां पर हम आपके लिए कुछ गणित और विज्ञान के प्रश्नों के हल लेकर आए हैं, कुछ महत्वपूर्ण सूत्र, और अभ्यास के लिए कुछ नए प्रश्न।

 इन सब के बारे में आपको हमारे ब्लॉग स्पॉट पर जानकारी मिलेगी।

 हमारा एक यूट्यूब चैनल है जहां पर आपको गणित और विज्ञान से संबंधित प्रश्नों उनके हल से संबंधित वीडियोस मिल जाएंगे कुछ प्लेलिस्ट आपको नीचे दी गई है।

Science playlist

Science Model Paper 2022 Class 10: https://www.youtube.com/playlist?list=PL1vrYsk4Sk9_zA_WEmrobr6kczfKH7R_J

10th Science: https://www.youtube.com/playlist?list=PL1vrYsk4Sk99AGBILgY9A-Pvf4dtX9pH-

10th Science 2020: https://www.youtube.com/playlist?list=PL1vrYsk4Sk99GJioxb8G9Pj0I2oog8S5j

Math Playlist

10th Mathe Important Question: https://www.youtube.com/playlist?list=PL1vrYsk4Sk9_UePIML76tQ6NjcAQOry7g

10th Math Model Paper 2022: https://www.youtube.com/playlist?list=PL1vrYsk4Sk9_FF8URxeD3VLORrbsowTVS

Model Paper 2020 Math Class 10: https://www.youtube.com/playlist?list=PL1vrYsk4Sk9_e-5kOWnTLNwMDsiK5rArq

10th Math Unsolved 2021: https://www.youtube.com/playlist?list=PL1vrYsk4Sk9_OBycYdbdfZPUHtdhm2T9d

10th Math Unsolved 2020: https://www.youtube.com/playlist?list=PL1vrYsk4Sk9-evykQzfvC7RePiFGUDGnz

10th Math Unsolved 2019: https://www.youtube.com/playlist?list=PL1vrYsk4Sk98suLcwDWlG9hBC0pLAvdax

10th Math Unsolved 2018: https://www.youtube.com/playlist?list=PL1vrYsk4Sk9-WuiCBciii2_oXRf2lLhSL

10th Math Unsolved 2017: https://www.youtube.com/playlist?list=PL1vrYsk4Sk9_plAy_Q5Fwmg0XvDKNtavF

10th Math https://youtube.com/playlist?list=PL1vrYsk4Sk9_7ZVLcVvYaKdqefCXdUZDb

त्रिकोणमिति के सूत्र

त्रिकोणमिति के सूत्र


त्रिकोणमिति अनुपातों के विशेष कोणों पर मान

Sin0° =0

Sin30° = 1/2

Sin45° = 1/√2

Sin60° = √3/2

Sin90° = 1

Cos is opposite of Sin

Tan0° = 0

Tan30° = 1/√3

Tan45° = 1

Tan60° = √3

Tan90° = ∞

Cot  is opposite of Tan

Sec0° = 1

Sec30° = 2/√3

Sec45° = √2

Sec60° = 2

Sec90° = ∞

Cosec  is opposite of Sec

2SinαCosβ=Sin(α+β)+Sin(α-β)

2CosαSinβ=Sin(α+β)-Sin(α-β)

2CosαCosβ=Cos(α+β)+Cos(α-β)

2SinαSinβ=Cos(α-β)-Cos(α+β)

Sin(α+β)=Sinα Cosβ+ Cosα Sinβ.

» Cos(α+β)=Cosα Cosβ - Sinα Sinβ.

» Sin(α-β)=SinαCosβ-CosαSinβ.

» Cos(α-β)=CosαCosβ+SinαSinβ.

» Tan(α+β)= (Tanα + Tanβ)/ (1−TanαTanβ)

» Tan(α−β)= (Tanα − Tanβ) / (1+ TanαTanβ)

» Cot(α+β)= (CotαCotβ −1) / (Cotα + Cotβ)

» Cot(α−β)= (CotαCotβ + 1) / (Cotβ− Cotα)

» Sin(α+β)=Sinα Cosβ+ Cosα Sinβ.

» Cos(α+β)=Cosα Cosβ +Sinα Sinβ.

» Sin(α-β)=SinαCosβ-CosαSinβ.

» Cos(α-β)=CosαCosβ+SinαSinβ.

» Tan(α+β)= (Tanα + Tanβ)/ (1−TanαTanβ)

» Tan(α−β)= (Tanα − Tanβ) / (1+ TanαTanβ)

» Cot(α+β)= (CotαCotβ −1) / (Cotα + Cotβ)

» Cot(α−β)= (CotαCotβ + 1) / (Cotβ− Cotα)

α/Sinα = β/Sinβ = γ/Sinγ = 2я

» α = β Cosγ + γ Cosβ

» β = α Cosγ + γ Cosα

» γ = α Cosβ + β Cosα

» Cosα = (β² + γ²− α²) / 2βγ

» Cosβ = (γ² + α²− β²) / 2γα

» Cosγ = (α² + β²− γ²) / 2γα

» Δ = αβγ/4я

» Sinθ  = 0 then, θ  = nπ

» Sinθ  = 1 then, θ  = (4n + 1)π/2

» Sinθ  =−1 then, θ  = (4n− 1)π/2

» Sinθ  = Sinα then, θ  = nπ (−1)^nα

 

1. Sin2α = 2SinαCosα

2. Cos2α = Cos²α − Sin²α

3. Cos2α = 2Cos²α − 1

4. Cos2α = 1 − Sin²α

5. 2Sin²α = 1 − Cos2α

6. 1 + Sin2α = (Sinα + Cosα)²

7. 1 − Sin2α = (Sinα − Cosα)²

8. Tan2α = 2Tanα / (1 − Tan²α)

9. Sin2α = 2Tanα / (1 + Tan²α)

10. Cos2α = (1 − Tan²α) / (1 + Tan²α)

11. 4Sin³α = 3Sinα − Sin3α

12. 4Cos³α = 3Cosα + Cos3α

 सर्वसमिकाएँ 

» Sin²θ +Cos²θ =1

» Sec²θ -Tan²θ =1

» Cosec²θ -Cot²θ =1

» Sinθ =1/Cosecθ

» Cosecθ =1/Sinθ

» Cosθ =1/Secθ

» Secθ =1/Cosθ

» Tanθ =1/Cotθ

» Cotθ =1/Tanθ

» Tanθ =Sinθ /Cosθ

 

Science Unsolved 2021 Class 10 Science Set 2 (824 HZ) खण्ड ख रसायन विज्ञान

Science Unsolved 2021 
Class 10
Science
Set 2 (824 HZ)

खण्ड ख
रसायन विज्ञान

5. (क) उदासीनीकरण अभिक्रिया होती है
(i) अम्ल एवं अम्लीय लवण में
(ii) क्षार एवं क्षारीय लवण में 
(iii) अम्ल एवं क्षार में
(iv) अम्ल एवं जल में
उत्तर- (iii) अम्ल एवं क्षार में

(ख) धावन सोडा की प्रकृति होती है,
(i) अम्लीय 
(ii) क्षारीय
(iii) उदासीन
(iv) इनमें से सभी
उत्तर - (ii) क्षारीय

(ग) ब्यूटेनोन में क्रियात्मक समूह है,
(i) - OH
(ii) — CHO
(iii) >C = O
(iv) -COOH
उत्तर - (iii) >C = O

6. (क) निम्न में से अम्ल एवं क्षारक की पहचान कर, कारण बतायेः 
(1) NH3 (ii) H2S

(i) NH3 एक क्षार है क्योंकि यह जल से क्रिया करके OH- तथा NH4+ आयन बनाता है।

(ii) H2S अम्ल है क्योंकि S परमाणु के बड़े आकार के कारण H-S बन्ध, H-O बन्ध की तुलना में कमजोर होता है।

(ख) विकर्ण सम्बन्ध को उदाहरण द्वारा समझाइए। 

तत्त्वों का विकर्ण सम्बन्ध- द्वितीय आवर्त के पहले तीन तत्त्व (Li, Be, B) तीसरे आवर्त के तत्त्वों तथा अगले वर्ग के दूसरे तत्त्व के साथ गुणों में समानता प्रदर्शित करते हैं। इसे विकर्ण सम्बन्ध कहते हैं।
(ग) संक्षारण को उदाहरण द्वारा समझाइए। 

उत्तर - अनेक धातुओं की सतहें वायु तथा जल से प्रभावित होती हैं। आयरन को जब आर्द्र वायु में अधिक समय तक खुला छोड़ देते हैं तो इसकी सतह पर भूरे रंग का एक पपड़ीदार पदार्थ का आवरण उत्पन्न हो जाता है इसे जंग कहते हैं। जंग हाइड्रेटेड आयरन (III) ऑक्साइड (Fe2 O3.H2O) होता है। इसी प्रकार, कॉपर की आर्द्र वायु में खुला छोड़ देने पर उसकी सतह पर हरे रंग के बेसिक कॉपर कार्बोनेट का आवरण उत्पन्न हो जाता है। अतः जब धातु सतह, जल, वायु या अन्य किसी पदार्थ से प्रभावित होती है तो इसे धातु का संक्षारित होना कहते हैं। इस परिघटना को संक्षारण कहते हैं।

7. (क) विद्युत रासायनिक श्रेणी किस आधार पर बनाई गयी है? इस श्रेणी की किन्हीं दो उपयोगिताओं का उल्लेख करें।

उत्तर-  विद्युत रासायनिक श्रेणी-जब धातुओं को उनके मानक इलेक्ट्रोड विभव के बढ़ते हुए क्रम में रखा जाता है तो एक श्रेणी प्राप्त होती है जिसे धातुओं की विद्युत रासायनिक श्रेणी' कहते हैं। हाइड्रोजन को श्रेणी के मध्य में रखा गया है और इसका मानक इलेक्ट्रोड विभव शून्य माना गया है। 

विद्युत रासायनिक श्रेणी की उपयोगिता - विद्युत रासायनिक श्रेणी के प्रमुख उपयोग निम्नलिखित हैं 
1. धातुओं के विस्थापन में - विद्युत रासायनिक श्रेणी में प्रत्येक धातु अपने से नीचे स्थित धातुओं को उनके लवण के जलीय विलयन से विस्थापित कर देती है। इसका कारण यह है कि जो धातु श्रेणी में ऊपर होती है उसका मानक अपचयन विभव कम होता है तथा वह अधिक क्रियाशील होती है। जैसे
Fe + CuSO4 → FeSO4 + Cu

2. धातुओं की क्रियाशीलता ज्ञात करने में - जिस धातु का मानक अपचयन विभव जितना अधिक ऋणात्मक अथवा कम धनात्मक होता है, वह धातु उतनी ही अधिक क्रियाशील होती है। यही कारण है कि Li, Na, K आदि क्षार धातु अधिक क्रियाशील होती हैं।

(ख) मिसेल क्या है? साबुन के स्वच्छीकारक क्रिया में इसकी क्या भूमिका होती है?
उत्तर - मिसेल (Micell) की अवधारणा के आधार पर साबुन की सफाई की क्रिया-विधि - साबुन को जल में घोलने पर RCOO- तथा Na+ या K+ में आयनित हो जाता है। RCOO- के दो भाग होते हैं

(i) अध्रुवीय भाग - इसमें ऐल्किल समूह (R) एक लम्बी श्रृंखला वाला समूह है। यह जल-विरोधी तथा तेलस्नेही होता है। 

(ii) ध्रुवीय भाग - इसमें उपस्थित कार्बोक्सिलेट आयन (COO- ) ध्रुवीय होता है तथा जलस्नेही है।
 C17H35COO- के दो भाग निम्न हैं 
जब साबुन को जल में घोला जाता है, तो RCOO- समूह कोलाइडी कणों के रूप में एकत्रित हो जाते हैं जिसमें ऋणावेशित कार्बोक्सिलेट आयन जल के सम्पर्क में रहते हैं तथा अध्रुवीय ऐल्किल समूह जल से दूर रहते हैं। इस प्रकार के कणों को मिसेल कहते हैं।
जब गन्दे कपड़ों को इसमें डुबोया जाता है। तो धूल, मिट्टी के कण, तेल, चिकनाई आदि मिसेल में चले जाते हैं तथा जल के साथ बह जाते हैं तथा कपड़े साफ हो जाते हैं।

8.(क) एथिल एल्कोहल तथा एसीटिक अम्ल के दो-दो गुणों का रासायनिक समीकरण लिखिए।
उत्तर- एथिल एल्कोहल के रासायनिक गुण
1.  दहन (Combustion)-एथिल ऐल्कोहॉल (एथेनॉल) अत्यन्त ज्वलनशील द्रव है। यह वायु में नीली लौ के साथ जलकर CO2 तथा H2O देता है।

C2H5OH + 302 → 2CO2 + 3H2O


2. सोडियम के साथ क्रिया - सोडियम धातु के साथ गर्म करने पर हाइड्रोजन गैस निकलती है तथा सोडियम ऐथॉक्साइड बनता है।

एसीटिक अम्ल के रासायनिक गुण
1. सोडियम धातु से क्रिया - यह सोडियम से क्रिया करके सोडियम ऐसीटेट तथा हाइड्रोजन बनाता है।
2. एथिल ऐल्कोहॉल से क्रिया (एस्टरीकरण) - जब सान्द्र H2SO4 की उपस्थिति में ऐसीटिक अम्ल को एथिल ऐल्कोहॉल के साथ 140°C तक गर्म किया जाता है, तो एस्टर (एथिल ऐसीटेट) तथा जल बनता है। इस प्रकार की क्रिया को एस्टरीकरण (esterification) कहते हैं।

 (ख) समझाइए कि आवर्त सारणी के एक वर्ग एवं एक आवर्त में परमाणु आकार में परिवर्तन किस प्रकार होता है।
उत्तर - आवर्त सारणी के वर्ग में ऊपर से नीचे आने पर परमाणु त्रिज्या ( परमाणु आकार )  बढ़ती है तथा आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर परमाणु का आकार घटता है ।

अथवा

निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए:

(i) प्रतिस्थापन अभिक्रिया

प्रतिस्थापन अभिक्रिया-वह रासायनिक अभिक्रिया, जिसमें अधिक क्रियाशील तत्त्व कम क्रियाशील तत्त्व के यौगिक से उस तत्त्व के परमाणु को विस्थापित कर स्वयं उसका स्थान ग्रहण कर लेता है, प्रतिस्थापन अभिक्रिया कहलाती है।
उदाहरण जैसे आयरन, कॉपर सल्फेट के जलीय विलयन से अभिक्रिया करके कॉपर को उसके सल्फेट से प्रतिस्थापित कर फेरस सल्फेट का जलीय विलयन बनाता है  
Fe(s) + CuSO4 (aq) → FeSO4 (aq) + Cu(s) 



(ii) हाइड्रोकार्बन का आई.यू.पी.ए.सी. नामकरण

हाइड्रोकार्बन का आई.यू.पी.ए.सी. (I.U.P.A.C.) नामकरण निम्न प्रकार से किया जाता है
IUPAC नाम = पूर्वलग्न + मूल शब्द + प्राथमिक अनुलग्न + द्वितीयक अनुलग्न
(1) ऐल्केन अथवा पैराफिन (संतृप्त हाइड्रोकार्बन)- ये कार्बन और हाइड्रोजन के यौगिक हैं जिनका सामान्य सूत्र  CnH2n+2   है। आई.यू.पी.ए.सी. पद्धति में संतृप्त हाइड्रोकार्बनों को ऐल्केन कहा जाता है, अन्य सब कार्बनिक यौगिकों को ऐल्कनों का व्युत्पन्न मानकर उनका नाम रखा जाता है। भिन्न-भिन्न सजातीय श्रेणियों के नाम ऐल्केन के नाम से अनुलग्न जोड़कर रखे जाते हैं।

अतः इस पद्धति में किसी कार्बनिक यौगिक का नाम दो भागों को मिलाकर बनता है। पहले भाग को पूर्वलग्न (Prefix) और दूसरे भाग को अनुलग्न (Suffix) कहते हैं।

ऐल्केनों के नाम उनमें उपस्थित कार्बन परमाणुओं की संख्या के आधार पर होते हैं, जैसे

CH4 C2H6 C3H8 C4H10 C5H12 C6H14

 मेथेन  एथेन   प्रोपेन  ब्यूटेन    पेन्टेन     हेक्सेन

(2) ओलीफिन अथवा ऐल्कीन (असंतृप्त हाइड्रोकार्बन) इस श्रेणी का सामान्य सूत्र CnH2n है। इसमें किन्हीं दो कार्बन परमाणुओं के मध्य एक द्विबन्ध होता है।
 
 इस श्रेणी के विभिन्न यौगिकों के नाम अनुरूप ऐल्केनों के नामों से लिए गये हैं। इसके लिए ऐल्केनों (alkanes) के नाम से एन (ane) अनुलग्न हटाकर साधारण नामों के लिए इलीन (ylene) और आई. यू. पी. ए. सी. नामों के लिए ईन (ene) लगाते हैं। 

(3) ऐसीटिलीन अथवा ऐल्काइन (असंतृप्त हाइड्रोकार्बन) - इस श्रेणी का सामान्य सूत्र CnH2n-2 है । इसमें कम से कम दो कार्बन परमाणुओं के मध्य एक त्रिबन्ध होता है। इस श्रेणी के यौगिकों के आई. यू. पी. ए. सी. नाम अनुरूप ऐल्केनों के नाम से लिये गये हैं। ऐल्केन (alkane) के नाम में एन (ane) अनुलग्न हटाकर आइन (yne) जोड़ते हैं।

(iii) कार्बनिक यौगिकों में योगात्मक अभिक्रिया
 उत्तर- पैलेडियम अथवा निकिल जैसे उत्प्रेरकों की उपस्थिति में असंतृप्त हाइड्रोकार्बन का हाइड्रोजन के योग द्वारा संतृप्त हाइड्रोकार्बन में बदलना संकलन अभिक्रिया कहलाती है।

Science Unsolved 2021 Class 10 Science Set 2 (824 HZ) खण्ड क भौतिक विज्ञान

Science Unsolved 2021 
Class 10
Science
Set 2 (824 HZ)

खण्ड क
भौतिक विज्ञान

1. (क) एक दर्पण के सामने रखी वस्तु का प्रतिबिंब आभासी, सीधा व बड़ा बनता है। वह दर्पण कैसा है ?

(i) अवतल 
(ii) उत्तल
(iii) समतल
(iv) इनमें से कोई भी नहीं

उत्तर - (i) अवतल


(ख) काँच के प्रिज्म से जब श्वेत प्रकाश की किरण गुजरती है तो वह अपने अवयवीय रंगों में विभक्त होती है। किस रंग के लिए विचलन सबसे अधिक है?

(i) लाल
 (ii) पीला 
(iii) हरा 
 (iv) बैंगनी

उत्तर - (iv) बैंगनी

(ग) वैद्युत मोटर परिवर्तित करता है

(i) यांत्रिक ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में
(ii) यांत्रिक ऊर्जा को वैद्युत ऊर्जा में
(iii) वैद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में
(iv) रासायनिक ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में

 उत्तर - (iii) वैद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में


(घ) विद्युत विभवान्तर का मात्रक है

(i) एम्पीयर 
(ii) ओम
(iii) वोल्ट 
(iv) वाट

उत्तर - (iii) वोल्ट

2. (क) निर्वात में प्रकाश का वेग 3 x 108 मीटर प्रति सेकण्ड है। एक पदार्थ जिसका अपवर्तनांक 1.5 है, में प्रकाश के वेग की गणना कीजिए।

उत्तर -
 निर्वात में प्रकाश का वेग C = 3 x 108 m/s
अपवर्तनांक n = 1.5 
पदार्थ प्रकाश के वेग v = ?
   n = C / v
   v = C / n
      = (3 x 108 ) / 1.5 
      = (30 × 108 ) / 15
   v = 2 × 108 m/s

(ख) एक अवतल दर्पण जिसकी फोकस दूरी 20 सेण्टीमीटर है, इसके सामने एक वस्तु उससे 60 सेण्टीमीटर की दूरी पर रखी है। वस्तु के प्रतिबिम्ब की स्थिति की गणना कीजिए।

उत्तर - अवतल दर्पण के लिए,
 फोकस दूरी f = - 20 cm
वस्तु की दर्पण से दूरी u = - 60 cm
वस्तु के प्रतिबिम्ब की स्थिति v = ?
दर्पण सूत्र से,
1/v + 1/u = 1/f
1/v = 1/f - 1/u
   = 1/(-20) - 1/(-60)
   = -1/20 + 1/60
   = (-3 +1)/60
   = (-2)/60
   = -1 / 30
 v = - 30 cm

(ग) गणना करके बताइए कि 1 किलोवाट घंटा (1 kWh) ऊर्जा का मान जूल में क्या होगा।

उत्तर -  1 किलोवाट घंटा = 1 × 1000 × 60 × 60 जूल
 = 3600000 जूल
 = 3.6 × 106 जूल

 3. (क) निकट दृष्टि दोष से पीड़ित एक व्यक्ति अधिक से अधिक 5 मीटर की दूरी तक देख सकता है। सही दृष्टि के लिए उसे किस फोकस दूरी के लेंस की आवश्यकता होगी?

उत्तर-  निकट दृष्टि दोष से पीड़ित व्यक्ति के सामने वस्तु अनंत पर होनी चाहिए
u = - ∞
v = - 5 m
लेंस सूत्र का उपयोग,
1/f = 1/v - 1/u
      = 1/(-5) - 1/ (-∞)
      = -1/5 - 0
(चूंकि 1/∞ = 0)
1/f  = -1/5
f = -5 m
अतः उस व्यक्ति को 5 m फोकस दूरी के अवतल लेंस की आवश्यकता है।

अथवा

दूर दृष्टि दोष से आप क्या समझते हैं? इस दोष का निवारण कैसे किया जाता है?

उत्तर -  जब मनुष्य को दूर की वस्तुएँ तो स्पष्ट दिखाई देती है परंतु पास की वस्तुए स्पष्ट नहीं दिखाई देती इसे दूर दृष्टि दोष कहते है।
दूर दृष्टि दोष के कारणः यह रोग निम्न में से एक कारण से हो सकता है।
(1) लेंस से रेटिना की दूरी कम हो जाए अर्थात् नेत्र के गोले की त्रिज्या कम हो जाए।
(2) लेंस के पृष्ठो की वक्रता कम हो अर्थात् लेंस पतला हो जाए जिससे उसकी फोकस दूरी बढ़ जाए।

निवारणः- इस दोष में लेंस की फोकस दूरी अधिक हो जाती है। जिससे लेंस की अभिसारी क्षमता कम हो जाती है। अतः इस दोष के निवारण के लिए ऐसा लेंस प्रयुक्त करना चाहिए जो नेत्र की अभिसारी क्षमता को बढ़ा दे अर्थात् उत्तल लेंस प्रयुक्त किया जाता है।

(ख) एक विद्युत हीटर पर 250 वोल्ट व 2.0 किलोवाट लिखा है। पूरी क्षमता से कार्य करने पर इससे कितनी विद्युत धारा प्रवाहित होगी? इसे प्रतिदिन 10 घंटे कार्य करते रहने पर 30 दिन में कितनी kWh (किलोवाट घंटा) ऊर्जा व्यय होगी? 

उत्तर - विद्युत हीटर का,
विभवांतर V = 250 वोल्ट
क्षमता P = 2 किलोवाट
             = 2000 वाट

P = Vi
i = P / V
  = 2000/250
  = 8 एम्पियर

क्षमता P = 2 किलोवाट
             = 2000 वाट
घंटे = 10 घंटे
दिन = 30 दिन

यूनिटों की संख्या = (वाट × घंटे × दिन) / 1000

 = (2000 × 10 × 30 )/ 1000
 = 600 यूनिट

अथवा

समरूप चुम्बकीय क्षेत्र में किसी धारावाही चालक पर लगने वाले बल की व्याख्या कीजिए। चालक पर लगने वाले बल की दिशा किस नियम से ज्ञात की जाती है? स्पष्ट एवं सचित्र उल्लेख कीजिए।

उत्तर- यदि एक वाह्य चुम्बकीय क्षेत्र B में, चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा से θ कोण पर स्थित l लम्बाई के चालक विद्युत धारा प्रवाहित हो रही हो तो उस पर कार्य करने वाला बल F
 (i) चुम्बकीय क्षेत्र B के अनुक्रमानुपाती होता है, अर्थात
       F ∝ B                                ...(i) 
(ii) चालक में प्रवाहित धारा के अनुक्रमानुपाती होता है, अर्थात 
       F ∝ i                                 ...(ii) 

(iii) चालक की लम्बाई l के अनुक्रमानुपाती होता है, अर्थात
     F ∝ l                               ...(iii)
(iv) चालक तथा चुम्बकीय क्षेत्र के बीच बने कोण की ज्या (sine) के अनुक्रमानुपाती होता है, अर्थात
    F ∝ Sin θ                          ...(iv)
सभी को मिलाने पर,
    F ∝ Bil Sin θ  
    F = KBil Sin θ    
जहाँ K एक नियतांक है। SI प्रणाली में B का मात्रक इस प्रकार लेते हैं कि K = 1, तो 
F = iBl Sin θ    

चालक पर लगने वाला बल फ्लेमिंग के बाएं हाथ के नियम से ज्ञात की जाती है।

फ्लेमिंग के बाएँ हाथ का नियम (Fleming's left hand rule)- 
यदि हम अपने बाएँ हाथ के अंगूठे तथा अंगूठे के पास वाली दोनों अंगुलियों (तर्जनी तथा मध्यमा) को इस प्रकार फैलाएँ कि तीनों परस्पर लम्बवत रहें तब यदि पहली अंगुली चुम्बकीय क्षेत्र (B) की दिशा और बीच वाली अंगुली (मध्यमा) धारा i की दिशा प्रदर्शित करती है तो अँगूठा चालक पर लगने वाले बल F की दिशा को प्रदर्शित करेगा।

4. प्रदत्त विद्युत परिपथ में प्रत्येक प्रतिरोधक R1, R2, R3, R4, R5, R6, R7, R8 व R9  में बहने वाली विद्युत धारा व प्रत्येक प्रतिरोधक के सिरों के बीच उत्पन्न विभवान्तर की गणना कीजिए। यहाँ R1 = 1 Ω, R2 = R3 = R4 = 3 Ω व R5 = R6 = R7 = R8 = R9 = 5 Ω 
उत्तर-  चूँकि R2, R3 व R4 समान्तर क्रम में हैं इस लिए इनका तुल्य प्रतिरोध
1/R' = 1/R2 + 1/R3 + 1/R4
        = 1/3 + 1/3 + 1/3
        = (1 + 1 + 1) / 3
        = 3/3
        = 1Ω
इसी प्रकार से R5, R6, R7, R8 व R9 भी समान्तर क्रम में हैं इसलिए इनका तुल्य प्रतिरोध
1/R'' = 1/R5 + 1/R6 + 1/R7 + 1/R8 + 1/R9
         = 1/5 + 1/5 + 1/5 + 1/5 + 1/5
         = ( 1 + 1 + 1 + 1 + 1)  / 5
         = 5/5
         = 1Ω
अब परिपथ का तुल्य प्रतिरोध
R = 1Ω + 1Ω + 1Ω
    = 3Ω
अब ,
विभवांतर V = 4.5 वोल्ट
प्रतिरोध R = 3Ω
V = iR
i = V / R
  = 4.5 / 3
  = 1.5 एम्पियर

अब यही धारा पूरे परिपथ में बहेगी। तो
R1 के विभवांतर के लिए,
 प्रतिरोध R1 = 1Ω
 धारा i = 1.5 एम्पियर
V = iR
V1 = 1.5 × 1
      = 1.5 वोल्ट

R2, R3 व R4 के विभवांतर के लिए,
 तुल्य प्रतिरोध R1 = 1Ω
 धारा i = 1.5 एम्पियर
V = iR
V1 = 1.5 × 1
      = 1.5 वोल्ट
चूँकि सभी श्रेणी क्रम में है तो सभी विभवांतर सामान होगा। इसलिए V2 = V3 = V4 = 1.5 वोल्ट

R5, R6, R7, R8 व R9 के विभवांतर के लिए,
 तुल्य प्रतिरोध R1 = 1Ω
 धारा i = 1.5 एम्पियर
V = iR
V1 = 1.5 × 1
      = 1.5 वोल्ट
चूँकि सभी श्रेणी क्रम में है तो सभी विभवांतर सामान होगा। इसलिए V5 = V6 = V7 = V8 = V9 = 1.5 वोल्ट

अथवा

विद्युत धारा जनित्र किस सिद्धान्त पर कार्य करता है? नामांकित चित्र बनाकर इसकी कार्यविधि समझाइए।

उत्तर - विद्युत् जनित्र एक प्रकार का यंत्र है जो यांत्रिक ऊर्जा को प्रत्यावर्तित विद्युत् धारा में परिवर्तित करता है।

सिद्धांत : प्रत्यावर्तित विद्युत् जनित्र विद्युतचुंबकीय प्रेरण के सिद्धांत पर कार्य करता है। जब एक कुंडली समानांतर चुंबकीय क्षेत्र में घूर्णन करती है, तो चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं कुंडली से गुजरती हैं और विद्युत् प्रेरित करती हैं और इसमें विद्युत् स्थापित करती हैं।

रचना : इसके मुख्य भाग निम्नलिखित हैं
 1. चुंबक: एक शक्तिशाली अवतल बेलनाकार चुंबक जैसे नाल चुंबक का कार्य है शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र बनाना।

2. कुंडली: एक आयताकार लोहे के टुकड़े पर तांबे की तार लपेटकर उसे कुंडली का रूप दिया जाता है। जिसमें विद्युत् धारा प्रवाह की जाती है और इसे चुंबकीय क्षेत्र में रखा जाता है जिससे इस पर बल लगता है और ये अपने अक्ष पर घूमता है। चित्र में ABCD कुंडली को दर्शाया गया है।

3. विभक्त वलय: यह अर्धगोल छल्ले होते हैं। ये कुंडली के दोनों सिरों से परस्पर जुड़े होते हैं और कुंडली के अर्ध घूर्णन के साथ ये भी घूर्णन करती हैं। चित्र में इन्हें S1 और S2 से दर्शाया गया है।

4. ब्रुश: B1 और B2 दो कार्बन या लचीले धातु की छड़ें हैं जो अर्धगोल छल्लों से परस्पर जुड़े होते हैं और इनका काम विद्युत् धारा को लोड तक ले जाना है। चित्र में इन्हें गैल्वेनोमीटर से जोड़ा गया है जो विद्युत् धारा को मापता है।
कार्यविधि : प्रारम्भ में ABCD स्थिति में कुण्डली चुम्बकीय बल रेखाओं के समान्तर है। जब कुण्डली को इस प्रकार घुमाया जाता है कि AB भाग ऊपर की ओर और CD भाग नीचे की ओर जाता है तो कुण्डली में से जाने वाले फ्लक्स में वृद्धि होती है फलतः कुण्डली में प्रेरित विद्युत वाहक बल उत्पन्न हो जाता है। फ्लेमिंग के दाएँ हाथ के नियमानुसार कुण्डली में प्रेरित धारा B से A की ओर तथा D से C की ओर बहती है। जब कुण्डली लम्बवत हो जाती है तो विद्युत वाहक बल अधिकतम हो जाता है। इस स्थिति तक आने में कुण्डली 0° से 90° तक घूम चुकी होती है। 90° से 180° तक कुण्डली घूमने पर फ्लक्स में कमी होती है और 180° पर पहुँचकर विद्युत वाहक बल शून्य हो जाता है। 180° से 270° तक कुण्डली घूमने पर फ्लक्स में वृद्धि विपरीत दिशा में होती है। 270° पर विद्युत वाहक बल विपरीत दिशा में अधिकतम हो जाता है। 270° से 360° की ओर कुण्डली घूमने पर विद्युत वाहक बल घटता है और 360° पर यह पुनः शून्य हो जाता है। इस प्रकार कुण्डली में एक पूर्ण चक्कर में दो बार विद्युत वाहक वल अधिकतम किन्तु विपरीत दिशाओं में होता है और दो बार शून्य होता है। इस प्रकार आर्मेचर के निरन्तर घूमते रहने से कुण्डली से बाह्य परिपथ में धारा बहने लगती है। धारा की दिशा बदलती रहने के कारण, इसे प्रत्यावर्ती धारा डायनमो (जनित्र) कहा जाता है।

भौतिक राशि Physical quantities अन्य भौतिक राशियों से संबंध

भौतिक राशि Physical quantities अन्य भौतिक राशियों से संबंध

1. क्षेत्रफल Area = लंबाई × चौड़ाई

2. आयतन Volume = लंबाई× चौड़ाई×ऊंचाई

3. द्रव्यमान घनत्व Density = द्रव्यमान/आयतन

4. आवृत्ति Frequency = 1/आवर्तकाल

5. वेग Velocity = विस्थापन/समय

6. चाल Speed = दूरी/समय

7. त्वरण Acceleration = वेग/समय

8. बल Force = द्रव्यमान × त्वरण

9. आवेग Impulse = बल × समय

10. कार्य Work = बल × दूरी

11. ऊर्जा Energy = बल × दूरी

12. शक्ति Power = कार्य/समय

13. संवेग Momentum = द्रव्यमान × वेग

14. दाब Pressure = बल/क्षेत्रफल

15. प्रतिबल Stress = बल/क्षेत्रफल

16. विकृति Strain = विमा में परिवर्तन/मूल विमा

17. प्रत्यास्थता गुणांक Coefficient of elasticity = प्रतिबल/विकृति

18. पृष्ठ तनाव Surface tension = बल/लंबाई

19. पृष्ठ ऊर्जा Surface energy = ऊर्जा/क्षेत्रफल

20. वेग प्रवणता Velocity gradient = वेग/दूरी

21. दाब प्रवणता Pressure gradient = दाब/दूरी

22. श्यानता गुणांक Coefficient of viscosity = बल/(क्षेत्रफल× वेग प्रवणता)

23. कोण Angel = चाप/त्रिज्या

24. त्रिकोणमितीय अनुपात Trigonometric ratio = लंबाई/लंबाई

25. कोणीय वेग Angular velocity = कोण/समय

26. कोणीय त्वरण Angular acelleration = कोणीय वेग/समय

27. कोणीय संवेग Angular momentum = जड़त्व आघूर्ण × कोणीय वेग
 
28. जड़त्व आघूर्ण Moment of inertia = द्रव्यमान× (परिभ्रमण त्रिज्या)2

29. बल आघूर्ण Torque = बल × दूरी

30. कोणीय आवृत्ति Angular frequency =  2π × आवृत्ति

31. गुरुत्वीय सार्वत्रिक नियतांक Universal constant of gravity = बल× (दूरी)2/(द्रव्यमान)2

32. प्लांक नियतांक Plank’s constant = ऊर्जा/आवृत्ति

33. विशिष्ट उष्मा Specific heat = उष्मीय ऊर्जा/(द्रव्यमान× ताप)

34. उष्मा धारिता Heat capacity = ऊष्मीय ऊर्जा/ताप

35. बोल्टजमान नियतांक Boltzmann’s constant = ऊर्जा/ताप

36. स्टीफन नियतांक Stefan’s constant = (ऊर्जा/क्षेत्रफल× समय)/(ताप)4

37. गैस नियतांक Gas constant = (दाब× आयतन)/(मोल× ताप )

38. आवेश Charge = विद्युत धारा × समय

39. विभवातंर Potential difference = कार्य/आवेश

40. प्रतिरोध Resistance = विभवांतर/विद्युत धारा

41. धारिता Capacity = आवेश/विभवांतर

42. विद्युत क्षेत्र Electric field = वैद्युत बल/आवेश

43. चुम्बकीय क्षेत्र Magnetic field = बल/(विद्युत धारा× लंबाई)

44. चुम्बकीय फ्लक्स  Magnetic flux = चुम्बकीय क्षेत्र × लंबाई

45. प्रेरकत्व Inductance = चुम्बकीय फ्लक्स/विद्युत धारा

46. वीन नियतांक Wein’s constant = तरंगदैर्ध्य ×ताप

47. चालकता Conductivity = 1/प्रतिरोध

48. एंट्रॅापी Entropy = ऊष्मीय ऊर्जा / ताप

49. गुप्त उष्मा Latent heat = उष्मीय ऊर्जा / द्रव्यमान

50. तापीय प्रसार गुणांक Coefficient of thermal expansion = विमा में परिवर्तन / (मूल विमा × ताप )

nbsp51. आयतन प्रत्यास्थता गुणांक Bulk modulus = ( आयतन × दाब में परिवर्तन )/आयतन में परिवर्तन

52. वैद्युत प्रतिरोधकता Electric resistance = ( प्रतिरोध × क्षेत्रफल )/ लंबाई

53. वैद्युत द्विध्रुव आघूर्ण Electric dipole moment = बल आघूर्ण / विद्युत क्षेत्र

54. चुम्बकीय द्विध्रुव आघूर्ण Magnetic dipole moment = बल आघूर्ण / चुम्बकीय क्षेत्र

55. चुम्बकीय क्षेत्र प्रबलता = चुम्बकीय आघूर्ण / आयतन

56. अपवर्तनांक Refractive index = निर्वात में प्रकाश की चाल/माध्यम में प्रकाश की चाल

57. तरंग संख्या Wave number = 2π / तरंगदैर्ध्य

58. विकिरण शक्ति Radiant power = उत्सर्जित ऊर्जा / समय

59. विकिरण तीव्रता Radiant intensity = विकिरण शक्ति / घन कोण

60. हबल नियतांक Hubble constant = पश्च सरण चाल /दूरी